शरदूत की कहानी – अपनी ज़ुबानी

Sherdoot – उत्कर्ष वाणी (Voice of Excellence)

मैं शरदूत हूँ।

इस बार मैं काग़ज़ से नहीं,
मंच से बोल रहा हूँ।
पिछले महीने जब ISAME का मंच सजा,
तो वहाँ सिर्फ़ भाषण नहीं हुए—
वहाँ विचार गूंजे,
अनुभव टकराए,
और प्रेरणा ने नए आकार लिए।

वहाँ संतों की वाणी, प्रमुख लायंस प्रतिनिधियों के दिशा सूचन और कई महानुभावों के द्वारा सेवा कार्यों के लिए किया गया महा योगदान का संकल्प …

मैंने उन सभी को सुना।
मैंने शब्दों के पीछे छिपा उत्कर्ष महसूस किया।
उत्कर्ष वाणी
मतलब एक स्वर नहीं—
बल्कि अनेक श्रेष्ठ आवाज़ों का संगम।
जहाँ हर वक्ता अलग था,
पर उद्देश्य एक—
बेहतर लायन, बेहतर नेतृत्व, बेहतर समाज।

उन्होंने हमें बताया
कि उत्कृष्टता कोई पद नहीं,
एक निरंतर अभ्यास है।
-कि प्रेरणा मंच से उतरकर
कार्यभूमि में उतरनी चाहिए।
और कि हर लायन के भीतर
एक प्रभावशाली वक्ता पहले से मौजूद है—
ज़रूरत है तो बस उसे सुनने की।
मैं, शरदूत,
उन सभी आवाज़ों को समेटकर
आप तक पहुँचा हूँ।
मैं तालियों की गूंज नहीं,
बल्कि उस मौन संकल्प की वाणी हूँ
जो हर सत्र के बाद
हमारे भीतर जन्म लेता है।

आज इस सातवें चरण में आप
केवल रिपोर्ट नहीं पढ़ेंगे—
आप मंच की धड़कन महसूस करेंगे।
आप विचारों की चिंगारी पाएँगे
जो आपके अगले सेवा प्रकल्प को
नई दिशा दे सकती है।

मैं शरदूत हूँ—
सेवा की आवाज,
नेतृत्व का प्रतिबिंब,
और उत्कर्ष की सतत यात्रा।
आइये मेरी वाणी में अपनी
आवाज़ जोड़िए—
ताकि यह उत्कर्ष केवल शब्द न रहे,
बल्कि हर सेवा कार्य में दिखाई दे।

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